पानी के लिए पानी की तरह बहाया करोड़ो-करोड़ फिर भी सूख रहा हलक,ग्रामीण बूंद बूंद को तरस रहे !
* महज 8-10 ग्राम पंचायतो मे ही हैंडपंप मरम्मत/रिबोर के नाम पर खर्च किए गए..एक करोड़
* "बिहका उर्फ पूरामुफ्ती" मे पानी खरीदकर पीने को विवश ग्रामीण..
* "कादिरपुर" ग्राम मे मंदिर के पास लगा हैंडपंप विगत पांच वर्षो से खराब..
* "सैदपुर खास" मे रीबोर के नाम पर जमकर हुआ बंदर बांट..
* हैंडपंप बदहाल है ग्रामीण हैंडपंप मे बांध रहे जानवर ..
* हैंडपंप खराब होने पर ग्रामीण खुद से या चंदा लगाकर दुरस्त कराने को मजबूर है..
प्रयागराज/भगवतपुर ब्लॉक ..हर घर को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सरकार करोड़ों की योजना चला रही है। धरातल पर गांवों में ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल के लिए लगे इंडियामार्का हैण्डपम्प मरम्मत के अभाव में शो-पीस बने है। इस कारण गरीब परिवार पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं।
प्रधान व सचिव मिलीभगत कर हर वर्ष पेयजल के नाम मोटी धनराशि गटक रहे हैं फिर भी लोगों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है।
पानी के लिए पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है फिर भी लोगों को शुद्ध पेयजल मयस्सर नहीं हो पा रहा है। विडम्बना यह है कि आल इज वेल का डंका पीटने वाले जिम्मेदार सब कुछ जानने के बाद भी चुप हैं। गांव का प्रधान हो या उच्चाधिकारी आपस में टालमटोल का खेल खेल रहे हैं। इससे यह समस्या दिन ब दिन जटिल होती जा रही है।
गांवों में ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए इंडिया मार्का हैण्डपम्प लगाए गए हैं।
कुछ मरम्मत के अभाव में शो-पीस बने हैं तो कुछ वर्षों से रिबोर की बाट देख रहे हैं। इस कारण गांवों के गरीब परिवार पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं।
शहर से सटे भगवतपुर विकास खंड के 45 ग्राम पंचायतो मे लगभग आधा दर्जन गांव ..बिहका उर्फ पूरामुफ्ती,केशवपुर- असरफपुर,असरवाल ..,कादिरपुर ,आदमपुर /मदारीपुर ,सैदपुर खास ..आदि में इसकी धरातलीय हकीकत परखी जा सकती है।
यहां के अधिकतर हैंडपंप उपेक्षा के कारण बदहाल स्थिति में पहुंच चुके हैं। इसकी वजह से ग्रामीणों को हर रोज सूखते हलक को तर करने के लिए जान हथेली पर रखना पड़ रहा है।
इन ग्राम पंचायतो मे बिहका उर्फ पूरामुफ्ती मे ग्रामीण दूसरों के घरों से पीने का पानी खरीदकर लाना पड़ता है। गर्मी शुरु होते ही हालात और खराब हो जाते है।
ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल देने के लिए शासन ने इंडिया मार्का हैंडपंपों के रख-रखाव की जिम्मेदारी जल निगम से हटाकर प्रधान को सौंप दिया। उम्मीद थी औपचारिकताओं की पेंच में उलझी व्यवस्था को लाभ मिलेगा और ग्रामीण प्यासे नहीं रहेंगे। पर अफसोस शासन की मंशा धरी की धरी रह गई।
कागजों में हैण्डपम्प मरम्मत व रिबोर दिखाकर लाखों-लाख रुपये का बंदरबांट किया जा रहा है।
शायद इस लूट खसोट की वजह से ही गांवों में लगे अधिकतर हैण्डपम्प शो-पीस बने हुए हैं। स्थिति यह है कि सार्वजनिक स्थानों पर लगे हैण्डपंप आज अपनी दुर्दशा पर रो रहे हैं। हालात यह है कि शिकायत के बाद भी स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं दिख रहा है।
यहां तक कि ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी इसकी शिकायत कर रखी फिर भी संज्ञान न लेना व्यवस्था की कमजोरी को इंगित कर रहा है।
कादिरपुर ग्राम निवासी ग्रामीणो ने बताया कि दरवाजे व मंदिर के समीप लगा इंडिया मार्का हैंडपंप पिछले 5 सालो से खराब पड़ा है। रिबोर के लिए कई बार कहा गया लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इससे दलित व पिछड़े बस्ती के लोगों को पेयजल के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
आपको बता दे कि ब्लॉक भगवतपुर अंतर्गत उपरोक्त सभी आधा दर्जन ग्राम पंचायते दलित व पिछड़े लोगो की बड़ी आबादी है ।
