कौशांबी मे जनगणना ड्यूटी के नाम पर संविदा शिक्षको (शिक्षामित्रो) पर बे इंतहा जुल्म!
* 18000 मानदेय, मतगणना करने के लिए 20 से 25000 के 5G मोबाइल की जरूरत..
* 40 से 50 किलोमीटर की प्रतिदिन यात्रा से बढ़ेगा आर्थिक बोझ..
* आग बरसाती गर्मी में 40- 50 किलोमीटर की यात्रा कर घर-घर मतगणना, लू या दूसरी बीमारियों का संकट..
कौशांबी/चायल ..जनगणना ड्यूटी के नाम पर संविदा शिक्षकों (शिक्षामित्र..) पर भारी दबाव और "वज्राघात" जैसी स्थिति प्रशासनिक आदेशों के कारण बन गई है।
कुछ ऐसा ही हाल के घटनाक्रमों में कौशांबी के चायल मे देखने को मिल रहा है ।जहा जनगणना कार्य के लिए शिक्षामित्रो को 40 से 50 किलोमीटर प्रतिदिन यात्रा करनी पड़ेगी। जबकि 18 000 हजार पाने वाले शिक्षामित्रो पर पहले से ही आर्थिक संकट रहा है ।
अब उनको उनके स्कूल व ब्लॉक की जगह दूसरे ब्लॉक के दूर दराज ग्राम पंचायतो में जनगणना के लिए भेजा जाना उनके और उनके परिवार पर कुठारा घाट जैसी स्थिति बना दी गई है ।
एक तरफ देश के पीएम नरेंद्र मोदी जी आवाह्न कर रहे है कि पेट्रोल डीजल बचाए दूसरी तरफ उनके मातहत और दूरी तय कराकर और अधिक पेट्रोल डीजल खर्च कराकर और अधिक आर्थिक संकट पैदा करने पर अमादा है ।
शिक्षामित्रो को मानदेय के रूप में 18000 ह.रुपए अभी मिलना ही प्रारंभ हुआ है। पूर्व में उनके परिवार पर बहुत ही आर्थिक संकट रहा,अब 18000 ह. पाने वाले शिक्षामित्र या शिक्षक कर्मी 20 से 25000 रुपए का 5G मोबाइल खरीदने को मजबूर हैं।
क्योंकि मतगणना के लिए बनाया गया भारत सरकार का एच एल ओ एप को अधिक स्टोरेज और 5G एंड्राइड फोन की आवश्यकता पड़ेगी जिसमें पुराने 2G, 3G, 4G मोबाइल से कार्य कर पाना संभव नहीं है।
एक तरफ महंगा मोबाइल खरीदने का दबाव और दूसरी तरफ लंबी दूरी तय कर मतगणना करने का संकट साथ मे भीषण आग बरसाती शरीर को झूलसाती गर्मी का कहर और जिम्मेदारों के तानाशाही पूर्ण आदेश अब शिक्षामित्रो के परिवार के ऊपर वज्राघात के समान ही है।
योगी सरकार का शिक्षामित्र को उनके पति के घर के नजदीक समायोजन का आदेश ठंडे बस्ते में पड़ा है।
जबकि उनको राहत मिलती आर्थिक बचत होती वही दूरी कम करने के बजाय मतगणना के नाम पर दूर दराज ग्राम पंचायत में भेज कर आर्थिक संकट शारीरिक मानसिक बिकार बढ़ाने का कुंठित प्रयास किया गया है।
