बर्थ एनिवर्सरी 5 मई:कैसेट किंग गुलशन कुमार को जेहादियो ने इसलिए मारा कि वह शिव भक्त झुका नही
गुलशन कुमार को अंडरवर्ल्ड डॉन अबु सलेम ने कॉल किया. उसने कहा, 'वैष्णो देवी में रोज लंगर खिलाते हो, कुछ हमें भी खिलाओ.' इसके बाद सलेम ने 10 खोखे यानी 10 करोड़ रुपये मांगे थे
जिहादी ने गोली मारते वक्त कहा 'बहुत कर ली पूजा, अब ऊपर जाकर करना
गुलशन कुमार आम हिन्दुस्तानी के लिए प्रेरणा स्रोत भी है कि एक आम से खास बने फिर भी धर्म से डिगे नही
कैसेट किंग गुलशन कुमार की, आज बर्थ एनिवर्सरी है. आज हम आपको बता रहे हैं कि आखिर इतनी बेरहमी से गुलशन कुमार की हत्या क्यों की गई?
साल 1997 वह दौर था, जब अंडरवर्ल्ड और फिल्म इंडस्ट्री के रिश्ते जगजाहिर हो चुके थे. साथ ही, इंडस्ट्री के नामचीन लोग अंडरवर्ल्ड के निशाने पर आ चुके थे. इन सभी के बीच 12 अगस्त 1997 के दिन ऐसा कांड हुआ, जिसने मायानगरी ही नहीं, पूरे देश को हिलाकर रख दिया. इसी दिन सुबह 10 बजकर 40 मिनट पर गुलशन कुमार को सरेआम गोलियों से भून दिया गया. दरअसल, 12 अगस्त 1997 को मंगलवार था. 42 साल के गुलशन कुमार पूजा की थाली लेकर अपने घर से निकले. उस वक्त घड़ी में 10 बजकर 10 मिनट का वक्त हो रहा था. वह रोजाना जीतनगर स्थित शिव मंदिर जाते थे, जो गुलशन कुमार ने चार साल पहले देखा था और महंगे टाइल्स आदि लगवाकर उसे नया बनवा दिया था. गुलशन का रुटीन तय था, जो अंडरवर्ल्ड की नजर में भी आ चुका था.
गुलशन कुमार मंदिर से पूजा करके लौटे तो समय 10 बजकर 40 मिनट हो रहा था. वह अपनी मारुति एस्टीम कार की तरफ बढ़ ही रहे थे कि उनकी कनपटी पर एक शख्स ने रिवॉल्वर लगा दिया. गुलशन कुमार ने पूछा कि यह क्या कर रहे हो? उस शख्स ने जवाब दिया, 'बहुत कर ली पूजा, अब ऊपर जाकर करना'. इसके बाद पहली गोली चली, जो गुलशन कुमार के माथे को छूती हुई निकल गई. उन्होंने भागने की कोशिश की और पास मौजूद एक घर में मदद की गुहार लगाई, लेकिन दरवाजा बंद कर लिया गया. दूसरे घर के भी दरवाजे बंद मिलते हैं. गुलशन कुमार के ड्राइवर रूपलाल ने हमलावरों पर कलश फेंका तो दो गोलियां उसके पैरों में मार दी गईं. गुलशन कुमार की पीठ और गर्दन में कुल 16 गोलियां लगी थीं. महज दो मिनट में पूरी वारदात को अंजाम दे दिया गया था.5 अगस्त 1997 के दिन गुलशन कुमार को अंडरवर्ल्ड डॉन अबु सलेम ने कॉल किया. उसने कहा, 'वैष्णो देवी में रोज लंगर खिलाते हो, कुछ हमें भी खिलाओ.' इसके बाद सलेम ने 10 खोखे यानी 10 करोड़ रुपये मांगे. साथ ही, नदीम के एल्बम को लेकर भी सवाल पूछा. 9 अगस्त को अबु सलेम ने दूसरा कॉल किया और दोबारा पैसे मांगे. सलेम ने साफ-साफ कहा कि तुम अंडरवर्ल्ड को हल्के में ले रहे हो. दरअसल, इन धमकियों के बाद बावजूद गुलशन कुमार ने पुलिस से शिकायत नहीं की, जिसका खमियाजा उन्हें अपनी जान गंवाकर भुगतना पड़ा.
दरअसल, इसका मकसद फिल्म इंडस्ट्री के उन लोगों में दहशत पैदा करना था, जो अंडरवर्ल्ड के सामने घुटने टेकने के लिए तैयार नहीं थे. हालांकि, गुलशन खौफ के इस खेल के पहले शिकार नहीं थे. उन्हें काफी समय से धमकियां मिल रही थीं, जिसे उन्होंने नजरअंदाज किया था.
टी-सीरीज की स्थापना 11 जुलाई 1983 के दिन हुई थी, लेकिन कंपनी को पहला बड़ा ब्रेक साल 1988 में फिल्म 'कयामत से कयामत तक' से मिला. फिल्म के 80 लाख कैसेट बिके. 1990 में रिलीज हुई आशिकी के म्यूजिक एल्बम ने तो रिकॉर्ड ही तोड़ दिए और कंपनी को शिखर पर पहुंचा दिया. बस इसके बाद से गुलशन कुमार कैसेट किंग कहलाने लगे. साल 1997 तक टिप्स और सारेगामा को पछाड़ते हुए टी-सीरीज ने 65 फीसदी मार्केट पर कब्जा कर लिया.
5 मई 1951 के दिन दिल्ली के मध्यमवर्गीय पंजाबी परिवार में जन्मे गुलशन कुमार के पिता चंद्रभान की दिल्ली के दरियागंज इलाके में जूस की दुकान थी. इस दुकान में गुलशन ने भी उनके साथ काम किया.
दुकान में गाने रिकॉर्ड करने के बाद महज सात रुपये में कैसेट्स बेची जाती थीं. गुलशन कुमार ने इसी दुकान से सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड की नींव रखी, जो देश की सबसे बड़ी म्यूजिक कंपनी बन गई. इसी म्यूजिक कंपनी के तहत टी-सीरीज की स्थापना की गई, जिसमें टी का मतलब त्रिशूल था. जब गुलशन का कारोबार बढ़ने लगा, तब उन्होंने मुंबई शिफ्ट होने की तैयारी कर ली.
